बिलासपुर | शुक्रवार की रात 16 जनवरी 2026 को शबे-मेराज के अवसर पर शहर की तमाम मस्जिदों में विशेष इबादत, तक़रीर और दुआओं का आयोजन किया गया। इस पावन और ऐतिहासिक रात में हज़रत मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु अलैहि वस्ल्लम के मेराज का वाक़या, अल्लाह से उनकी मुलाक़ात और इस रात की फज़ीलत पर विस्तार से रोशनी डाली गई।
शबे-मेराज इस्लाम धर्म की वह महान रात है, जब अल्लाह तआला ने अपने महबूब रसूल ﷺ को आसमानों की सैर कराई और अपनी क़ुदरत, तजल्ली और अजमत का दीदार कराया। इस रात को नमाज़, ज़िक्र, तिलावत और दुआओं के ज़रिए ईमान को मजबूत करने की सीख दी गई।
इसी क्रम में तालापारा तैयबा चौक स्थित हुसैनी मस्जिद में आयोजित विशेष मजलिस में इमाम-ओ-ख़तीब जनाब सैयद जाहिर आग़ा साहब ने अपने ख़िताब में अल्लाह की तजल्ली, उसकी अजमत और अजमत-ए-मुस्तफा पर प्रभावशाली बयान प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि शबे-मेराज इंसान को नमाज़ की अहमियत, सब्र, सच्चाई और नेक रास्ते पर चलने का संदेश देती है।
उन्होंने अपने संबोधन में यह भी कहा कि यह मुक़द्दस रात समाज में भाईचारे, अमन, आपसी प्रेम और इंसानियत को मजबूत करने की प्रेरणा देती है। मजलिस के दौरान देश में अमन-चैन, समाज में एकता और अखंडता के लिए विशेष दुआएं की गईं।
शहर की विभिन्न मस्जिदों में शबे-मेराज की रात पूरी अकीदत और एहतराम के साथ मनाई गई, जिससे समाज में धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक सौहार्द का वातावरण देखने को मिला।
