बिलासपुर
एस सी/ एस टी/ ओबीसी अखिल भारतीय महासंघ रायपुर दुर्ग व एनसीपी ने दिया खुला समर्थन एस सी एस टी ओबीसी अखिल भारतीय महासंघ प्रदेश अध्यक्ष इंजी. कौशल वर्मा ने कहा की संविधान के तहत गरीब जनता का मौलिक अधिकार रोटी,कपड़ा और जमीन,रोजगार है l इसको छीनने का प्रयास किया जा रहा है सरकार के द्वारा हम इन गरीबों की लड़ाई सामाजिक न्याय के लिए लड़ेंगे l
निलेश विश्वास बोले— “रोड से लेकर कोर्ट तक लड़ेंगे लिंगियाडीह वासियों की लड़ाई”
बिलासपुर।
लिंगियाडीह क्षेत्र में चल रहा लिंगियाडीह बचाओ आंदोलन अपने 48वें दिन भी पूरे जोश और जनसमर्थन के साथ जारी रहा। विगत 48 दिनों से अपने पेट और स्थायी निवास की सुरक्षा को लेकर आंदोलनरत लिंगियाडीह वासियों को आज राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) का खुला और मजबूत समर्थन मिला।
आंदोलन स्थल पर एनसीपी के प्रदेश अध्यक्ष निलेश विश्वास, प्रदेश प्रवक्ता, प्रदेश सचिव सहित पार्टी की पूरी टीम पहुंची और आंदोलनकारियों के साथ एकजुटता दिखाई। इस दौरान निलेश विश्वास ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि लिंगियाडीह के लोगों की यह लड़ाई सिर्फ सड़क तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि जरूरत पड़ी तो कोर्ट तक ले जाई जाएगी।
अखिल भारतीय sc St OBC महासंघ के प्रांतीय अध्यक्ष इंजीनियर कौशल वर्मा जी ने समर्थन देते हुए कहा है उन्होंने भरोसा दिलाया कि जब तक प्रभावित लोगों को न्याय स्थायी नहीं मिल जाता, तब तक एस सी एस टी ओबीसी अखिल भारतीय महासंघ लिंगियाडीह के साथ खड़ा है उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी रहेगी।
“यह सिर्फ जमीन नहीं, लोगों के जीवन का सवाल है”
एस टी एस सी ओबीसी महासंघ के धर्मपाल वर्मा जी ने कहा कि लिंगियाडीह वासी बीते 48 दिनों से शांतिपूर्ण तरीके से अपने हक की मांग कर रहे हैं।
सामाजिक कार्यकर्ता श्रीमती ग़जलक्ष्मी नारायणी यह संघर्ष केवल जमीन का नहीं, बल्कि हजारों परिवारों के पेट, रोजगार और भविष्य से जुड़ा हुआ है। उन्होंने प्रशासन से संवेदनशीलता दिखाने और मानवीय दृष्टिकोण से स्थायी समाधान निकालने की मांग की।
सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों का भी मिला साथ
आंदोलन को समर्थन देने के लिए एनसीपी की पूरी टीम के साथ हिमांशु राज, देवव्रत घोष सहित कई अन्य सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि भी मौके पर पहुंचे। वहीं रायपुर से विशेष रूप से कुशल वर्मा, प्रेमलाल वर्मा और अरुण बघेल भी बिलासपुर पहुंचे और आंदोलनकारियों का हौसला बढ़ाया।
48 दिनों से जारी संघर्ष
लिंगियाडीह वासी पिछले 48 दिनों से लगातार आंदोलन कर रहे हैं। उनका कहना है कि वे वर्षों से यहां रहकर जीवन यापन कर रहे हैं और अब अचानक उनके आशियाने और रोज़ी-रोटी पर संकट खड़ा हो गया है। आंदोलनकारियों की मुख्य मांग है कि उन्हें उजाड़ने से पहले स्थायी पुनर्वास और वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
आंदोलन और तेज होने के संकेत
एनसीपी नेताओं और सामाजिक संगठनों के समर्थन के बाद आंदोलन को नई ऊर्जा मिली है। आंदोलनकारियों ने संकेत दिए हैं कि यदि उनकी मांगों पर जल्द ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
लिंगियाडीह बचाओ आंदोलन अब सिर्फ स्थानीय नहीं, बल्कि एक बड़े जनआंदोलन का रूप लेता नजर आ रहा है, जिसमें राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है।
