• बिलासपुर।छ त्तीसगढ़ पुलिस आरक्षक भर्ती प्रक्रिया 2023-24 में सामने आई गंभीर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के खिलाफ चयन से वंचित युवाओं का आक्रोश अब सड़कों पर साफ दिखाई देने लगा है। योग्य अभ्यर्थियों को दरकिनार कर अपात्र लोगों के चयन, नंबर बढ़ाने, लेन-देन और भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोपों को लेकर अभ्यर्थियों ने बिलासपुर से रायपुर सीएम हाउस तक न्याय पदयात्रा का ऐलान किया है।

युवाओं का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में पहले राजनांदगांव में भ्रष्टाचार उजागर हुआ, जहां जांच के बाद भर्ती रद्द कर पुनः प्रक्रिया कराई गई। उसी तर्ज पर बिलासपुर सहित अन्य जिलों में भी जांच के दौरान 129 अभ्यर्थियों में गंभीर अनियमितताएं सामने आईं, बावजूद इसके अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई। यह मामला आज भी न्यायालय में लंबित है, जिससे युवाओं का भविष्य अधर में लटका हुआ है।

प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल

अभ्यर्थियों ने बताया कि उन्होंने छत्तीसगढ़ के लगभग सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों को ज्ञापन सौंपा, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई ठोस पहल नहीं हुई। इससे आक्रोशित होकर युवाओं ने शांतिपूर्ण और अनुशासित तरीके से न्याय पदयात्रा का निर्णय लिया है, जो 15 जनवरी 2026 से 17 जनवरी 2026 तक बिलासपुर से रायपुर सीएम हाउस तक निकाली जाएगी।

जन चेतना भारत पार्टी का समर्थन, अध्यक्ष जसबीर सिंह चावला युवाओं के साथ कदमताल

इस न्याय संघर्ष में जन चेतना भारत पार्टी के अध्यक्ष जसबीर सिंह चावला ने खुलकर युवाओं का साथ दिया। उन्होंने न केवल आंदोलन का समर्थन किया, बल्कि लगभग 10 से 12 किलोमीटर तक युवाओं के साथ पैदल यात्रा कर उनका मनोबल बढ़ाया।

जसबीर सिंह चावला ने युवाओं को रास्ते में आने वाली संभावित समस्याओं से अवगत कराया, उनकी सुरक्षा से जुड़ी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित कराईं, और यह भी सिखाया कि किस प्रकार अनुशासन, शांति और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात प्रशासन तक मजबूती से रखी जा सकती है। उन्होंने युवाओं को समझाया कि यह संघर्ष सिर्फ नौकरी का नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के भविष्य और ईमानदार व्यवस्था का सवाल है।

युवा बोले – न्याय नहीं मिला तो आंदोलन और तेज होगा

आंदोलनकारी युवाओं का कहना है कि यदि प्रशासन ने इस बार भी उनकी आवाज अनसुनी की, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। उनका साफ कहना है कि वे किसी भी तरह की अराजकता नहीं चाहते, लेकिन न्याय के लिए संघर्ष से पीछे भी नहीं हटेंगे।

यह संघर्ष केवल कुछ अभ्यर्थियों का नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के उन हजारों युवाओं की आवाज है, जो मेहनत, योग्यता और ईमानदारी के बल पर अपने भविष्य का निर्माण करना चाहते हैं।

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