1. देश में बढ़ती नफरत, मॉब लिंचिंग और अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों को लेकर पीयूसीएल ने गंभीर चिंता जताई है। बिलासपुर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज़ यानी पीयूसीएल ने कहा कि नफरती एजेंडा अब लोकतंत्र और संविधान के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है।

बिलासपुर में 7 जनवरी 2026 को आयोजित प्रेस वार्ता में पीयूसीएल के राष्ट्रीय, राज्य और छत्तीसगढ़ इकाई के पदाधिकारियों ने कहा कि देश के कई हिस्सों में अल्पसंख्यकों, प्रवासियों, दलितों, आदिवासियों और बंगाली भाषियों को निशाना बनाकर हिंसा फैलाई जा रही है।

 

पीयूसीएल ने 17 दिसंबर 2025 को छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले के दलित मजदूर रामनारायण बघेल की केरल में हुई मॉब लिंचिंग का जिक्र करते हुए बताया कि उन्हें ‘बांग्लादेशी’ कहकर पीटा गया, जिससे उनकी मौत हो गई। इस मामले में केरल पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें भाजपा-आरएसएस पृष्ठभूमि से जुड़े लोग भी शामिल बताए गए हैं।

 

बाइट (ग्राफिक):

“नफरत फैलाने वाले संगठनों पर सख्त कार्रवाई जरूरी है – पीयूसीएल”

 

पीयूसीएल ने आरोप लगाया कि छत्तीसगढ़ में भी 15 से 17 दिसंबर के बीच कोरबा जिले के बड़े तेंदुआ और आमाडांड गांवों में आदिवासी समुदाय के खिलाफ धार्मिक आधार पर हिंसा भड़काई गई। स्थानीय चर्च पर हमला, तोड़फोड़ और धमकी की घटनाओं के बावजूद प्रशासन द्वारा कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।

 

संगठन ने यह भी कहा कि बस्तर और सरगुजा जैसे आदिवासी क्षेत्रों में लोकतांत्रिक अधिकारों का बड़े पैमाने पर हनन हो रहा है। जेलों में बंद निर्दोष लोगों को सरकार के आश्वासन के बावजूद रिहा नहीं किय

 

 

 

बिलासपुर।

देश में बढ़ती सांप्रदायिक हिंसा, मॉब लिंचिंग और अल्पसंख्यकों के खिलाफ नफरत फैलाने की घटनाओं को लेकर पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज़ (PUCL) ने गहरी चिंता जताई है। बुधवार को बिलासपुर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पीयूसीएल के राष्ट्रीय, राज्य और छत्तीसगढ़ इकाई के पदाधिकारियों ने कहा कि नफरती एजेंडा देश के संविधान, लोकतंत्र और नागरिक स्वतंत्रता के लिए गंभीर खतरा बन चुका है।

 

पीयूसीएल ने बताया कि अल्पसंख्यकों, प्रवासियों, दलितों, आदिवासियों और बंगाली भाषियों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। 17 दिसंबर 2025 को छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले के निवासी दलित मजदूर रामनारायण बघेल की केरल में मॉब लिंचिंग कर हत्या कर दी गई। उन्हें ‘बांग्लादेशी’ बताकर बेरहमी से पीटा गया। इस मामले में केरल पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें से अधिकांश का संबंध भाजपा-आरएसएस पृष्ठभूमि से बताया गया है।

 

पीयूसीएल ने आरोप लगाया कि बंगाली भाषियों के खिलाफ नफरत फैलाने का यही माहौल ओडिशा और अन्य राज्यों में भी प्रवासी मजदूरों की मौत का कारण बन रहा है।

 

छत्तीसगढ़ में भी हालात चिंताजनक बताए गए। संगठन के अनुसार 15 से 17 दिसंबर के बीच कोरबा जिले के बड़े तेंदुआ और आमाडांड गांवों में ईसाई आदिवासियों के खिलाफ हिंसा भड़काई गई। चर्च में तोड़फोड़, धार्मिक उत्पीड़न और धमकी की घटनाएं सामने आईं, लेकिन प्रशासन और पुलिस द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

 

पीयूसीएल ने यह भी कहा कि बस्तर और सरगुजा जैसे आदिवासी बहुल क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर लोकतांत्रिक अधिकारों और मानवाधिकारों का उल्लंघन हो रहा है। सरकार द्वारा जेल में बंद लोगों को रिहा करने के सार्वजनिक आश्वासन के बावजूद अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

संगठन ने मांग की कि नफरत फैलाने वाले संगठनों, मॉब लिंचिंग, सांप्रदायिक हिंसा और मानवाधिकार उल्लंघन के मामलों में शामिल लोगों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए तथा सभी नागरिकों को संविधान में प्रदत्त समानता और स्वतंत्रता का अधिकार सुनिश्चित किया जाए।

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