बिलासपुर प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा ग्रामीण रोजगार कानून मनरेगा को निरस्त करने के विरोध में कांग्रेस पार्टी द्वारा 45 दिवसीय राष्ट्रव्यापी अभियान ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ शुरू किया है। प्रदेश भर के जिल मुख्यालयों में एक दिवसीय अनशन रविवार को गांधी चौक पर हुआ। इसके पूर्व शनिवार को पूर्व डिप्टी सीएम टी एस सिंहदेव ने प्रेसवार्ता आयोजित कर इसका विरोध जताया था। जिला कांग्रेस कमेटी के तत्वाधान में आयोजित अनशन में गांधी जी की प्रतिमा का माल्यापर्ण कर अनशन शुरू किया गया, जिला कांग्रेस कमेटी ग्रामीण के अध्यक्ष महेन्द्र गंगोत्री ने बताया कि कांग्रेस इस संघर्ष को तब तक जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध है, जब तक कि हम काम, आजीविका और जवाबदेही के उस अधिकार की बहाली हासिल नहीं कर लेते, जिसे नरेन्द्र मोदी सरकार ने मनरेगा को ध्वस्त करके छीन लिया है। इन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को
रोजगार देने वाली मनरेगा का नाम बदलने और इस योजना में बदलाव करने पर कांग्रेस आंदोलन कर रही है, मनरेगा के तहत ग्रामीण और गरीब लोगों को काम का अधिकार मिलता था लेकिन इस योजना में बदलाव करके केंद्र सरकार राइट टू वर्क यानी काम का अधिकार खत्म कर रही है नए प्रावधानों में 125 दिन का रोजगार देने के दावे किए जा रहे हैं लेकिन बीते दो वर्ष में भाजपा सरकार ने किसी भी ग्रामीण मजदूर को 100 दिन का रोजगार भी नहीं दिया तो 125 दिन का रोजगार देने की बात करना बेमानी है, लोगों को 30 से 35 दिन का काम भी मुश्किल से मिल पाएगा। जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष ने कहा कि नाम परिवर्तन के बहाने सरकार मनरेगा की मूल भावना को कमजोर कर रही है और इसे कानून से हटाकर महज एक सरकारी योजना के रूप में सीमित करना चाहती है। इन्होंने कहा कि मनरेगा को मूल स्वरूप वापस लाना है,
जिसमें केन्द्र सरकार का 90 प्रतिशत और 10 प्रतिशत राज्य सरकार की हिस्सेदारी रहती थी। पहले गांव के हर मजदूर को रोजगार गारंटी के तहत काम मिलता था,मगर यह लागू होने से खत्म हो जाएगा। मोदी सरकार के नए कानून में मनरेगा का नाम बदलकर विकसित भारत गारंटी एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण)” किया है. मनरेगा का नाम बदलने के साथ ही इसके नियमों में भी संशोधन किया गया है। इस कानून को जल्द केन्द्र सरकार वापस नहीं ली दे सड़क से लेकर ससंद तक विरोध किया जाएगा। कांग्रेस शहर अध्यक्ष सिधांशु मिश्रा ने कहा कि केंद्र सरकार मनरेगा जैसे ऐतिहासिक कानून को धीरे-धीरे खत्म करने की साजिश कर रही है, ताकि गरीबों से रोजगार की गारंटी छीनी जा सके। मनरेगा केवल एक योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण गरीबों के लिए जीवन रेखा है, इस कानून के माध्यम से लाखों परिवारों को वर्ष में न्यूनतम 100 दिन का रोजगार मिलता रहा है7 नाम परिवर्तन के बहाने सरकार मनरेगा की मूल भावना को कमजोर कर रही है और इसे कानून से हटाकर महज एक सरकारी योजना के रूप मेंसीमित करना चाहती है। इन अनशन में महेंद्र गंगोत्री,सिदांशु मिश्रा,शैलेश पांडे,विजय केशरवानी,विजय पांडे,प्रमोद नायक,राजेंद्र शुक्ला ,पंकज सिंह,राजेश पांडेभरत कश्यप,रामा बघेल,जितेंद्र पांडे,शेख नजरुद्दीन,सुभाष ठाकुर,गौरव ऐरीगजेंद्र श्रीवास्तव,पवन साहू,आशीष गोयल,ब्रह्मदेव सिंह,राकेश शर्मा,नरेंद्र बोलर,महेश दुबे ,अभय नारायण राय,रविन्द्र सिंह,समीर अहमद,सीमा घृतैस,शिल्पी तिवारी,स्वर्ण शुक्ला पिंकी बत्रा चित्रकांत श्रीवास,जावेद मेनन,लक्ष्मीनाथ साहअरविंद शुक्ला,विनोद साहूशैलेंद्र जायसवाल,जुगल किशोर,दिलीप पाटिल,ओम कश्यप ,अर्पित केशरवानी ,अखिलेश गुप्ता प्रीति पाटनवार जफर अलीकरम गोरखसीताराम परदेसी राज उपस्थित थे।
